मुफ़्त मंगल दोष जाँच
मंगल दोष जाँच
लग्न, चंद्र और शुक्र से मंगल
क्या मंगल आपकी लग्न, चंद्र और शुक्र राशि से दोष भाव में बैठा है — वे तीन बिंदु जो परंपरागत रूप से जाँचे जाते हैं।
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यह जाँच क्या बताती है, और क्या नहीं
यहाँ मंगल दोष सिर्फ़ कच्ची स्थिति के रूप में पढ़ा जाता है — क्या मंगल लग्न, चंद्र और शुक्र से पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में है, जो सबसे ज़्यादा माना जाने वाला छह-भाव पाठ है। यह जाँच दोष भंग (निवारण की शर्तें) नहीं जाँचती: शास्त्रों में कई निवारण शर्तें गिनाई गई हैं जिन पर एक राय नहीं है, और अंदाज़े से निवारण बताना स्थिति को सीधे बताने से भी बुरा होगा। पक्का फैसला किसी ज्योतिषी से चाहिए जो पूरी कुंडली तौल सके।
क्या यह दोष भंग (निवारण) भी जाँचती है?
नहीं, जानबूझकर नहीं। शास्त्रों में कई निवारण शर्तें हैं जिन पर राय अलग है, इसलिए यह जाँच सिर्फ़ इतना बताती है कि मंगल दोष भाव में है या नहीं — अंतिम फैसला नहीं।
लग्न, चंद्र और शुक्र — तीन बिंदु ही क्यों?
परंपरागत अभ्यास तीनों से मंगल जाँचता है; कुंडली एक से दोष दिखा सकती है और दूसरे से नहीं, और हर एक अलग से बताया जाता है।
क्या छह-भाव पाठ ही एकमात्र है?
नहीं — कुछ शास्त्र सिर्फ़ चार भाव (पहला, चौथा, सातवाँ, आठवाँ) मानते हैं, दूसरा और बारहवाँ छोड़कर। दोनों पाठ प्रचलन में हैं, और यह जाँच छह-भाव वाला पाठ इस्तेमाल करती है।