शतभिषा नक्षत्र
27 में से 24- स्वामी: राहु
- देवता: वरुण
- राशि में स्थान: कुंभ
चंद्र इस नक्षत्र में
- 24-09-2026, 10:35 सुबह से 11:23 सुबह, 25 सितंबर तक
- 21-10-2026, 7:48 शाम से 8:49 रात, 22 अक्तूबर तक
- 18-11-2026, 4:35 सुबह से 6:11 सुबह, 19 नवंबर तक
समय भारतीय समय (IST) में है। चंद्र का नक्षत्र बदलना एक ही पल है — हर शहर में वही पल, सिर्फ़ घड़ी का समय अलग नहीं होता।
एक नज़र में
- स्वामीराहु
- देवतावरुण
- चिह्नख़ाली घेरा
- गणराक्षस
- योनिअश्व (घोड़ा)
- तत्ववायु
- पुरुषार्थमोक्ष
- दोषवात
- लिंगपुरुष
- राशि में स्थान6°40' – 20°00' कुंभ
शतभिषा नक्षत्र के बारे में
शतभिषा का अर्थ है 'सौ वैद्य'। इसके देवता वरुण हैं। यह नक्षत्र इलाज का भी है और एकांत का भी — यहाँ जन्मे लोग भीड़ में रहकर भी अकेले रहते हैं।
मुख्य गुण
- इलाज और शोध में रुचि
- अकेले रहना पसंद
- अपने नियम ख़ुद बनाते हैं
- गहरी और अलग सोच
- रहस्य में रुचि
- सच के पक्के
- जल्दी घुलते नहीं
- सोच समय से आगे
मज़बूत पक्ष / कमज़ोर पक्ष
मज़बूत पक्ष
- अपने दम पर काम करते हैं
- गहरी खोज कर सकते हैं
- भीड़ के पीछे नहीं चलते
- इलाज में सचमुच अच्छे
कमज़ोर पक्ष
- अकेलापन बढ़ जाता है
- ज़िद पकड़ लेते हैं
- मन की बात नहीं कहते
- दूसरों से दूरी बना लेते हैं
पद और नामाक्षर
| पद | नामाक्षर | नवांश राशि |
|---|---|---|
| 1 | गो | धनु |
| 2 | सा | मकर |
| 3 | सी | कुंभ |
| 4 | सू | मीन |
काम-धंधा
- चिकित्सा और शोध
- ज्योतिष और गूढ़ विद्या
- तकनीक और सॉफ़्टवेयर
- बिजली और अंतरिक्ष
- जल और पर्यावरण का काम
सेहत में ध्यान
- टखने और पिंडली
- ख़ून का दौरा
- मानसिक तनाव
नक्षत्र मंत्र
ॐ वरुणाय नमः
रोज़ 108 बार जाप करें। सबसे अच्छा दिन: शनिवार।
उपाय
- शनिवार को शिव जी का अभिषेक करें
- 'ॐ रां राहवे नमः' का जाप करें
- गहरा नीला रंग पहनें
- बहते पानी में तिल प्रवाहित करें
- दवा और कंबल का दान करें
नक्षत्र मिलान
नक्षत्र से 36 में से 21 गुण ही तय होते हैं — तारा, योनि, गण और नाड़ी। बाकी 15 के लिए दोनों की चंद्र राशि चाहिए, जो नक्षत्र से तय नहीं होती।
सबसे अच्छा मेल
सबसे कम मेल
पूरा गुण मिलान करेंअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शतभिषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इसीलिए शतभिषा में जन्मे व्यक्ति की विंशोत्तरी दशा राहु से शुरू होती है।
शतभिषा नक्षत्र किस राशि में आता है?
पूरा शतभिषा नक्षत्र कुंभ राशि में है — 6°40' से 20°0' तक।
शतभिषा नक्षत्र में जन्मे बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें?
पद के हिसाब से गो, सा, सी या सू। जन्म के समय चंद्र किस पद में था, उसी का अक्षर लिया जाता है।
शतभिषा नक्षत्र का गण और योनि क्या है?
शतभिषा का गण राक्षस और योनि अश्व (घोड़ा) है। विवाह मिलान में गण से 6 और नाड़ी से 8 गुण तय होते हैं।