आश्लेषा नक्षत्र
27 में से 9- स्वामी: बुध
- देवता: नाग
- राशि में स्थान: कर्क
चंद्र इस नक्षत्र में
- 05-10-2026, 11:10 रात से 10:18 रात, 6 अक्तूबर तक
- 02-11-2026, 4:31 सुबह से 3:47 रात, 3 नवंबर तक
- 29-11-2026, 11:00 सुबह से 9:43 सुबह, 30 नवंबर तक
समय भारतीय समय (IST) में है। चंद्र का नक्षत्र बदलना एक ही पल है — हर शहर में वही पल, सिर्फ़ घड़ी का समय अलग नहीं होता।
एक नज़र में
- स्वामीबुध
- देवतानाग
- चिह्नलिपटा हुआ साँप
- गणराक्षस
- योनिमार्जार (बिल्ली)
- तत्वजल
- पुरुषार्थधर्म
- दोषकफ
- लिंगस्त्री
- राशि में स्थान16°40' – 0°00' कर्क
आश्लेषा नक्षत्र के बारे में
आश्लेषा के देवता नाग हैं। यह नक्षत्र लपेटने का है — पकड़ने का भी और बाँधने का भी। यहाँ जन्मे लोग बहुत गहरे होते हैं और सामने वाले को पढ़ लेते हैं।
मुख्य गुण
- सामने वाले को पढ़ लेते हैं
- बात गहरी रखते हैं
- मन में रहस्य
- बुद्धि बहुत तेज़
- अपनी बात मनवा लेते हैं
- भावनाएँ गहरी
- जल्दी भरोसा नहीं करते
- इलाज और तंत्र में रुचि
मज़बूत पक्ष / कमज़ोर पक्ष
मज़बूत पक्ष
- लोगों को समझने में माहिर
- मुश्किल हालात संभाल लेते हैं
- गहरी पढ़ाई कर सकते हैं
- अपना बचाव करना जानते हैं
कमज़ोर पक्ष
- शक ज़्यादा करते हैं
- बात घुमा देते हैं
- मन में बदला रख लेते हैं
- अकेलापन पसंद आने लगता है
पद और नामाक्षर
| पद | नामाक्षर | नवांश राशि |
|---|---|---|
| 1 | डी | धनु |
| 2 | डू | मकर |
| 3 | डे | कुंभ |
| 4 | डो | मीन |
काम-धंधा
- दवा और इलाज
- मनोविज्ञान
- जाँच और ख़ुफ़िया काम
- राजनीति और कूटनीति
- रसायन और प्रयोगशाला
सेहत में ध्यान
- पेट और आँतें
- जोड़ों का दर्द
- घबराहट
नक्षत्र मंत्र
ॐ नागेभ्यः नमः
रोज़ 108 बार जाप करें। सबसे अच्छा दिन: बुधवार।
उपाय
- नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करें
- 'ॐ बुं बुधाय नमः' का जाप करें
- हरा रंग पहनें
- साँप को दूध न पिलाएँ, बल्कि अन्न दान करें
- बुधवार को गणेश जी की पूजा करें
नक्षत्र मिलान
नक्षत्र से 36 में से 21 गुण ही तय होते हैं — तारा, योनि, गण और नाड़ी। बाकी 15 के लिए दोनों की चंद्र राशि चाहिए, जो नक्षत्र से तय नहीं होती।
सबसे अच्छा मेल
सबसे कम मेल
पूरा गुण मिलान करेंअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी बुध है। इसीलिए आश्लेषा में जन्मे व्यक्ति की विंशोत्तरी दशा बुध से शुरू होती है।
आश्लेषा नक्षत्र किस राशि में आता है?
पूरा आश्लेषा नक्षत्र कर्क राशि में है — 16°40' से 0°0' तक।
आश्लेषा नक्षत्र में जन्मे बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें?
पद के हिसाब से डी, डू, डे या डो। जन्म के समय चंद्र किस पद में था, उसी का अक्षर लिया जाता है।
आश्लेषा नक्षत्र का गण और योनि क्या है?
आश्लेषा का गण राक्षस और योनि मार्जार (बिल्ली) है। विवाह मिलान में गण से 6 और नाड़ी से 8 गुण तय होते हैं।