पुष्य नक्षत्र
27 में से 8- स्वामी: शनि
- देवता: बृहस्पति
- राशि में स्थान: कर्क
चंद्र इस नक्षत्र में
- 05-10-2026, 12:14 रात से 11:10 रात तक
- 01-11-2026, 5:40 सुबह से 4:31 सुबह, 2 नवंबर तक
- 28-11-2026, 12:50 दोपहर से 11:00 सुबह, 29 नवंबर तक
समय भारतीय समय (IST) में है। चंद्र का नक्षत्र बदलना एक ही पल है — हर शहर में वही पल, सिर्फ़ घड़ी का समय अलग नहीं होता।
एक नज़र में
- स्वामीशनि
- देवताबृहस्पति
- चिह्नकमल और गाय का थन
- गणदेव
- योनिमेष (भेड़)
- तत्वजल
- पुरुषार्थमोक्ष
- दोषकफ
- लिंगपुरुष
- राशि में स्थान3°20' – 16°40' कर्क
पुष्य नक्षत्र के बारे में
पुष्य को सबसे शुभ नक्षत्र माना जाता है। इसके देवता बृहस्पति हैं — देवगुरु। यह पोषण का नक्षत्र है: जो यहाँ बोया जाता है, वह पलता है।
मुख्य गुण
- दूसरों का ख़याल रखते हैं
- धर्म और नीति पर चलते हैं
- भरोसे के लायक़
- बड़ों का आदर करते हैं
- मन शांत रहता है
- सलाह देने में अच्छे
- परिवार पहले
- मेहनत से नाम कमाते हैं
मज़बूत पक्ष / कमज़ोर पक्ष
मज़बूत पक्ष
- लोग सलाह के लिए इन्हीं के पास आते हैं
- काम में ईमानदारी
- मुसीबत में सहारा बनते हैं
- धीरे-धीरे पर पक्का बढ़ते हैं
कमज़ोर पक्ष
- ज़रूरत से ज़्यादा सावधान
- बदलाव से हिचकते हैं
- अपनी बात पर अड़ जाते हैं
- दूसरों के लिए ख़ुद को भूल जाते हैं
पद और नामाक्षर
| पद | नामाक्षर | नवांश राशि |
|---|---|---|
| 1 | हु | सिंह |
| 2 | हे | कन्या |
| 3 | हो | तुला |
| 4 | डा | वृश्चिक |
काम-धंधा
- शिक्षा और अध्यापन
- पुरोहित और धर्म का काम
- खान-पान और अनाज
- बैंक, बीमा, वित्त
- समाज सेवा और देखभाल
सेहत में ध्यान
- पेट और पाचन
- छाती
- पानी की कमी
नक्षत्र मंत्र
ॐ बृहस्पतये नमः
रोज़ 108 बार जाप करें। सबसे अच्छा दिन: गुरुवार।
उपाय
- गुरुवार को बृहस्पति की पूजा करें
- 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का जाप करें
- पीला और सुनहरा रंग पहनें
- ग़रीबों को अन्न दान करें
- पीपल के पेड़ को जल दें
नक्षत्र मिलान
नक्षत्र से 36 में से 21 गुण ही तय होते हैं — तारा, योनि, गण और नाड़ी। बाकी 15 के लिए दोनों की चंद्र राशि चाहिए, जो नक्षत्र से तय नहीं होती।
सबसे अच्छा मेल
सबसे कम मेल
पूरा गुण मिलान करेंअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पुष्य नक्षत्र का स्वामी कौन है?
पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है। इसीलिए पुष्य में जन्मे व्यक्ति की विंशोत्तरी दशा शनि से शुरू होती है।
पुष्य नक्षत्र किस राशि में आता है?
पूरा पुष्य नक्षत्र कर्क राशि में है — 3°20' से 16°40' तक।
पुष्य नक्षत्र में जन्मे बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें?
पद के हिसाब से हु, हे, हो या डा। जन्म के समय चंद्र किस पद में था, उसी का अक्षर लिया जाता है।
पुष्य नक्षत्र का गण और योनि क्या है?
पुष्य का गण देव और योनि मेष (भेड़) है। विवाह मिलान में गण से 6 और नाड़ी से 8 गुण तय होते हैं।