मूल नक्षत्र
27 में से 19- स्वामी: केतु
- देवता: निरृति
- राशि में स्थान: धनु
चंद्र इस नक्षत्र में
- 18-09-2026, 10:45 रात से 1:43 रात, 20 सितंबर तक
- 16-10-2026, 6:48 सुबह से 9:47 सुबह, 17 अक्तूबर तक
- 12-11-2026, 2:19 दोपहर से 5:17 शाम, 13 नवंबर तक
समय भारतीय समय (IST) में है। चंद्र का नक्षत्र बदलना एक ही पल है — हर शहर में वही पल, सिर्फ़ घड़ी का समय अलग नहीं होता।
एक नज़र में
- स्वामीकेतु
- देवतानिरृति
- चिह्नजड़ों का गुच्छा
- गणराक्षस
- योनिश्वान (कुत्ता)
- तत्वअग्नि
- पुरुषार्थकाम
- दोषपित्त
- लिंगस्त्री
- राशि में स्थान0°00' – 13°20' धनु
मूल नक्षत्र के बारे में
मूल का अर्थ ही जड़ है, और इसकी देवी निरृति हैं। यह नक्षत्र तह तक जाने का है — ऊपर का हटाकर नीचे क्या है, वह देखने का। यहाँ जन्मे लोग सतह पर नहीं रुकते।
मुख्य गुण
- जड़ तक जाने की आदत
- सवाल पूछते रहते हैं
- अध्यात्म में गहरी रुचि
- सीधी बात
- मोह जल्दी छोड़ देते हैं
- उतार-चढ़ाव भरा जीवन
- खोजी स्वभाव
- भीतर से निडर
मज़बूत पक्ष / कमज़ोर पक्ष
मज़बूत पक्ष
- सच्चाई तक पहुँच जाते हैं
- बड़ा नुक़सान भी सह लेते हैं
- गहरी पढ़ाई कर सकते हैं
- नया सिरे से शुरू कर लेते हैं
कमज़ोर पक्ष
- जीवन में उथल-पुथल रहती है
- रिश्तों में दूरी आ जाती है
- बात कठोर हो जाती है
- एक जगह मन नहीं लगता
पद और नामाक्षर
| पद | नामाक्षर | नवांश राशि |
|---|---|---|
| 1 | ये | मेष |
| 2 | यो | वृषभ |
| 3 | भा | मिथुन |
| 4 | भी | कर्क |
काम-धंधा
- शोध और जाँच
- औषधि और जड़ी-बूटी
- अध्यात्म और साधना
- दर्शन और अध्यापन
- आपदा और राहत का काम
सेहत में ध्यान
- कूल्हे और जांघ
- पैर
- पाचन
नक्षत्र मंत्र
ॐ निरृतये नमः
रोज़ 108 बार जाप करें। सबसे अच्छा दिन: मंगलवार।
उपाय
- मंगलवार को गणेश जी की पूजा करें
- 'ॐ कें केतवे नमः' का जाप करें
- भूरा और लाल रंग पहनें
- पेड़ लगाएँ और उसकी देखभाल करें
- कंबल और तिल का दान करें
नक्षत्र मिलान
नक्षत्र से 36 में से 21 गुण ही तय होते हैं — तारा, योनि, गण और नाड़ी। बाकी 15 के लिए दोनों की चंद्र राशि चाहिए, जो नक्षत्र से तय नहीं होती।
सबसे अच्छा मेल
सबसे कम मेल
पूरा गुण मिलान करेंअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मूल नक्षत्र का स्वामी कौन है?
मूल नक्षत्र का स्वामी केतु है। इसीलिए मूल में जन्मे व्यक्ति की विंशोत्तरी दशा केतु से शुरू होती है।
मूल नक्षत्र किस राशि में आता है?
पूरा मूल नक्षत्र धनु राशि में है — 0°0' से 13°20' तक।
मूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें?
पद के हिसाब से ये, यो, भा या भी। जन्म के समय चंद्र किस पद में था, उसी का अक्षर लिया जाता है।
मूल नक्षत्र का गण और योनि क्या है?
मूल का गण राक्षस और योनि श्वान (कुत्ता) है। विवाह मिलान में गण से 6 और नाड़ी से 8 गुण तय होते हैं।