स्वाति नक्षत्र
27 में से 15- स्वामी: राहु
- देवता: वायु
- राशि में स्थान: तुला
चंद्र इस नक्षत्र में
- 11-10-2026, 10:33 रात से 11:52 रात, 12 अक्तूबर तक
- 08-11-2026, 5:53 सुबह से 7:24 सुबह, 9 नवंबर तक
- 05-12-2026, 11:49 सुबह से 1:38 दोपहर, 6 दिसंबर तक
समय भारतीय समय (IST) में है। चंद्र का नक्षत्र बदलना एक ही पल है — हर शहर में वही पल, सिर्फ़ घड़ी का समय अलग नहीं होता।
एक नज़र में
- स्वामीराहु
- देवतावायु
- चिह्नहवा में हिलता अंकुर
- गणदेव
- योनिमहिष (भैंसा)
- तत्ववायु
- पुरुषार्थकाम
- दोषवात
- लिंगस्त्री
- राशि में स्थान6°40' – 20°00' तुला
स्वाति नक्षत्र के बारे में
स्वाति के देवता वायु हैं। हवा को कोई बाँध नहीं सकता — यही इस नक्षत्र का स्वभाव है। यहाँ जन्मे लोगों को अपनी आज़ादी सबसे प्यारी होती है।
मुख्य गुण
- आज़ादी सबसे प्यारी
- मोल-भाव में माहिर
- मिलनसार और नरम
- अपनी जगह ख़ुद बनाते हैं
- संतुलन बनाना आता है
- यात्रा का शौक़
- बात से रास्ता निकालते हैं
- बंधन भारी लगता है
मज़बूत पक्ष / कमज़ोर पक्ष
मज़बूत पक्ष
- अपने बल पर आगे बढ़ते हैं
- व्यापार में अच्छे
- झगड़ा सुलझा देते हैं
- हर हाल में ढल जाते हैं
कमज़ोर पक्ष
- फ़ैसला बदलते रहते हैं
- एक जगह टिकते नहीं
- बहुत सोचते हैं
- दूसरों की राय पर बहते हैं
पद और नामाक्षर
| पद | नामाक्षर | नवांश राशि |
|---|---|---|
| 1 | रू | धनु |
| 2 | रे | मकर |
| 3 | रो | कुंभ |
| 4 | ता | मीन |
काम-धंधा
- व्यापार और आयात-निर्यात
- मोल-भाव और दलाली
- हवाई और परिवहन सेवा
- स्वतंत्र काम और सलाहकार
- क़ानून और मध्यस्थता
सेहत में ध्यान
- साँस और फेफड़े
- पेट में गैस
- त्वचा
नक्षत्र मंत्र
ॐ वायवे नमः
रोज़ 108 बार जाप करें। सबसे अच्छा दिन: शनिवार।
उपाय
- शनिवार को हनुमान जी की पूजा करें
- 'ॐ रां राहवे नमः' का जाप करें
- नीला और धूसर रंग पहनें
- पक्षियों को दाना डालें
- तिल और सरसों के तेल का दान करें
नक्षत्र मिलान
नक्षत्र से 36 में से 21 गुण ही तय होते हैं — तारा, योनि, गण और नाड़ी। बाकी 15 के लिए दोनों की चंद्र राशि चाहिए, जो नक्षत्र से तय नहीं होती।
सबसे अच्छा मेल
सबसे कम मेल
पूरा गुण मिलान करेंअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्वाति नक्षत्र का स्वामी कौन है?
स्वाति नक्षत्र का स्वामी राहु है। इसीलिए स्वाति में जन्मे व्यक्ति की विंशोत्तरी दशा राहु से शुरू होती है।
स्वाति नक्षत्र किस राशि में आता है?
पूरा स्वाति नक्षत्र तुला राशि में है — 6°40' से 20°0' तक।
स्वाति नक्षत्र में जन्मे बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें?
पद के हिसाब से रू, रे, रो या ता। जन्म के समय चंद्र किस पद में था, उसी का अक्षर लिया जाता है।
स्वाति नक्षत्र का गण और योनि क्या है?
स्वाति का गण देव और योनि महिष (भैंसा) है। विवाह मिलान में गण से 6 और नाड़ी से 8 गुण तय होते हैं।