धनिष्ठा नक्षत्र
27 में से 23- स्वामी: मंगल
- देवता: वसु
- राशि में स्थान: मकर / कुंभ
चंद्र इस नक्षत्र में
- 23-09-2026, 9:09 सुबह से 10:35 सुबह, 24 सितंबर तक
- 20-10-2026, 6:02 शाम से 7:48 शाम, 21 अक्तूबर तक
- 17-11-2026, 2:17 रात से 4:35 सुबह, 18 नवंबर तक
समय भारतीय समय (IST) में है। चंद्र का नक्षत्र बदलना एक ही पल है — हर शहर में वही पल, सिर्फ़ घड़ी का समय अलग नहीं होता।
एक नज़र में
- स्वामीमंगल
- देवतावसु
- चिह्नढोल
- गणराक्षस
- योनिसिंह (शेर)
- तत्वपृथ्वी
- पुरुषार्थकाम
- दोषकफ
- लिंगस्त्री
- राशि में स्थान23°20' – 6°40' मकर / कुंभ
धनिष्ठा नक्षत्र के बारे में
धनिष्ठा के देवता आठ वसु हैं — धन और वैभव के देवता। इसका चिह्न ढोल है। यह नक्षत्र लय का है: संगीत का भी और कमाई का भी।
मुख्य गुण
- संगीत और लय का गुण
- कमाने में तेज़
- मिलनसार और लोकप्रिय
- उदार हाथ
- समूह में काम करते हैं
- महत्वाकांक्षी
- जोश भरपूर
- दान देने में आगे
मज़बूत पक्ष / कमज़ोर पक्ष
मज़बूत पक्ष
- पैसा कमा भी लेते हैं और बाँट भी देते हैं
- टीम को साथ लेकर चलते हैं
- संगीत और कला में अच्छे
- जोश कभी कम नहीं होता
कमज़ोर पक्ष
- जल्दबाज़ी करते हैं
- ग़ुस्सा तेज़
- दिखावे पर ख़र्च
- रिश्तों में देर हो जाती है
पद और नामाक्षर
| पद | नामाक्षर | नवांश राशि |
|---|---|---|
| 1 | गा | सिंह |
| 2 | गी | कन्या |
| 3 | गू | तुला |
| 4 | गे | वृश्चिक |
काम-धंधा
- संगीत और नृत्य
- व्यापार और निवेश
- रियल एस्टेट और ज़मीन
- इंजीनियरिंग और तकनीक
- रक्षा सेवा
सेहत में ध्यान
- टखने और पिंडली
- ख़ून की गड़बड़ी
- जोड़ों का दर्द
नक्षत्र मंत्र
ॐ वसुभ्यो नमः
रोज़ 108 बार जाप करें। सबसे अच्छा दिन: मंगलवार।
उपाय
- मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करें
- 'ॐ अं अंगारकाय नमः' का जाप करें
- लाल रंग पहनें
- ज़रूरतमंद को धन दान करें
- मसूर और तांबे का दान करें
नक्षत्र मिलान
नक्षत्र से 36 में से 21 गुण ही तय होते हैं — तारा, योनि, गण और नाड़ी। बाकी 15 के लिए दोनों की चंद्र राशि चाहिए, जो नक्षत्र से तय नहीं होती।
सबसे अच्छा मेल
सबसे कम मेल
पूरा गुण मिलान करेंअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इसीलिए धनिष्ठा में जन्मे व्यक्ति की विंशोत्तरी दशा मंगल से शुरू होती है।
धनिष्ठा नक्षत्र किस राशि में आता है?
धनिष्ठा नक्षत्र दो राशियों में फैला है — पहला हिस्सा मकर में और बाक़ी कुंभ में।
धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें?
पद के हिसाब से गा, गी, गू या गे। जन्म के समय चंद्र किस पद में था, उसी का अक्षर लिया जाता है।
धनिष्ठा नक्षत्र का गण और योनि क्या है?
धनिष्ठा का गण राक्षस और योनि सिंह (शेर) है। विवाह मिलान में गण से 6 और नाड़ी से 8 गुण तय होते हैं।