भरणी नक्षत्र
27 में से 2- स्वामी: शुक्र
- देवता: यम
- राशि में स्थान: मेष
चंद्र इस नक्षत्र में
- 29-09-2026, 9:04 सुबह से 7:37 सुबह, 30 सितंबर तक
- 26-10-2026, 5:41 शाम से 3:39 दोपहर, 27 अक्तूबर तक
- 23-11-2026, 4:16 सुबह से 2:02 रात, 24 नवंबर तक
समय भारतीय समय (IST) में है। चंद्र का नक्षत्र बदलना एक ही पल है — हर शहर में वही पल, सिर्फ़ घड़ी का समय अलग नहीं होता।
एक नज़र में
- स्वामीशुक्र
- देवतायम
- चिह्नयोनि
- गणमनुष्य
- योनिगज (हाथी)
- तत्वअग्नि
- पुरुषार्थअर्थ
- दोषपित्त
- लिंगस्त्री
- राशि में स्थान13°20' – 26°40' मेष
भरणी नक्षत्र के बारे में
भरणी के देवता यम हैं — जो सही और ग़लत का हिसाब रखते हैं। यह नक्षत्र सहने और बदलने का है। यहाँ जन्मे लोग भीतर से बहुत मज़बूत होते हैं और बोझ उठाना जानते हैं।
मुख्य गुण
- भीतर से बहुत मज़बूत
- जो ठान लें वह करते हैं
- सही-ग़लत का पक्का हिसाब
- मेहनत से पीछे नहीं हटते
- भावनाएँ गहरी होती हैं
- रचनात्मक मन
- ज़िम्मेदारी उठा लेते हैं
- मुश्किल में डटे रहते हैं
मज़बूत पक्ष / कमज़ोर पक्ष
मज़बूत पक्ष
- वादा निभाते हैं
- दबाव में टूटते नहीं
- सच बोलने से नहीं डरते
- परिवार के लिए बहुत करते हैं
कमज़ोर पक्ष
- ज़िद पकड़ लेते हैं
- मन में बात रख लेते हैं
- दूसरों को जल्दी परख लेते हैं
- आराम करना नहीं आता
पद और नामाक्षर
| पद | नामाक्षर | नवांश राशि |
|---|---|---|
| 1 | ली | सिंह |
| 2 | लू | कन्या |
| 3 | ले | तुला |
| 4 | लो | वृश्चिक |
काम-धंधा
- क़ानून और न्याय
- कला, सिनेमा, संगीत
- स्त्री-रोग और प्रसूति
- खेती और ज़मीन का काम
- प्रबंधन और देखरेख
सेहत में ध्यान
- सिर और आँखें
- प्रजनन अंग
- पेट के निचले हिस्से
नक्षत्र मंत्र
ॐ यमाय नमः
रोज़ 108 बार जाप करें। सबसे अच्छा दिन: शुक्रवार।
उपाय
- शुक्रवार को माँ दुर्गा की पूजा करें
- 'ॐ शुं शुक्राय नमः' का जाप करें
- सफ़ेद और गुलाबी रंग पहनें
- कन्याओं को भोजन कराएँ
- यमराज के लिए तिल का दान करें
नक्षत्र मिलान
नक्षत्र से 36 में से 21 गुण ही तय होते हैं — तारा, योनि, गण और नाड़ी। बाकी 15 के लिए दोनों की चंद्र राशि चाहिए, जो नक्षत्र से तय नहीं होती।
सबसे अच्छा मेल
सबसे कम मेल
पूरा गुण मिलान करेंअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भरणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?
भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इसीलिए भरणी में जन्मे व्यक्ति की विंशोत्तरी दशा शुक्र से शुरू होती है।
भरणी नक्षत्र किस राशि में आता है?
पूरा भरणी नक्षत्र मेष राशि में है — 13°20' से 26°40' तक।
भरणी नक्षत्र में जन्मे बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें?
पद के हिसाब से ली, लू, ले या लो। जन्म के समय चंद्र किस पद में था, उसी का अक्षर लिया जाता है।
भरणी नक्षत्र का गण और योनि क्या है?
भरणी का गण मनुष्य और योनि गज (हाथी) है। विवाह मिलान में गण से 6 और नाड़ी से 8 गुण तय होते हैं।