मृगशिरा नक्षत्र
27 में से 5- स्वामी: मंगल
- देवता: सोम (चंद्र)
- राशि में स्थान: वृषभ / मिथुन
चंद्र इस नक्षत्र में
- 02-10-2026, 4:27 सुबह से 2:55 रात, 3 अक्तूबर तक
- 29-10-2026, 11:12 सुबह से 9:05 सुबह, 30 अक्तूबर तक
- 25-11-2026, 8:36 रात से 5:47 शाम, 26 नवंबर तक
समय भारतीय समय (IST) में है। चंद्र का नक्षत्र बदलना एक ही पल है — हर शहर में वही पल, सिर्फ़ घड़ी का समय अलग नहीं होता।
एक नज़र में
- स्वामीमंगल
- देवतासोम (चंद्र)
- चिह्नहिरण का मुख
- गणदेव
- योनिसर्प (साँप)
- तत्वपृथ्वी
- पुरुषार्थधर्म
- दोषकफ
- लिंगस्त्री
- राशि में स्थान23°20' – 6°40' वृषभ / मिथुन
मृगशिरा नक्षत्र के बारे में
मृगशिरा के देवता सोम हैं, और इसका चिह्न हिरण का मुख है — जो हमेशा कुछ खोजता रहता है। यहाँ जन्मे लोग जिज्ञासु होते हैं, सवाल पूछते हैं, और एक जगह टिकना उन्हें भारी लगता है।
मुख्य गुण
- बहुत जिज्ञासु
- घूमने-फिरने का शौक़
- बात करने में माहिर
- नई चीज़ें जल्दी सीखते हैं
- स्वभाव में नरमी
- शक भी जल्दी होता है
- मन चंचल रहता है
- खोजबीन में आगे
मज़बूत पक्ष / कमज़ोर पक्ष
मज़बूत पक्ष
- कहीं भी घुल-मिल जाते हैं
- सीखना कभी नहीं छोड़ते
- बात से काम निकाल लेते हैं
- नए रास्ते ढूँढ लेते हैं
कमज़ोर पक्ष
- मन एक जगह नहीं टिकता
- शक करने लगते हैं
- अधूरा छोड़ देते हैं
- छोटी बात पर घबरा जाते हैं
पद और नामाक्षर
| पद | नामाक्षर | नवांश राशि |
|---|---|---|
| 1 | वे | सिंह |
| 2 | वो | कन्या |
| 3 | का | तुला |
| 4 | की | वृश्चिक |
काम-धंधा
- लिखना, पत्रकारिता, अनुवाद
- यात्रा और पर्यटन
- शोध और खोज
- बिक्री और व्यापार
- कपड़ा और सुगंध का काम
सेहत में ध्यान
- गला और छाती
- कंधे और बाँहें
- नींद की गड़बड़ी
नक्षत्र मंत्र
ॐ सोमाय नमः
रोज़ 108 बार जाप करें। सबसे अच्छा दिन: मंगलवार।
उपाय
- मंगलवार को हनुमान जी के दर्शन करें
- 'ॐ अं अंगारकाय नमः' का जाप करें
- लाल रंग पहनें
- मसूर की दाल का दान करें
- हिरण या गाय को चारा खिलाएँ
नक्षत्र मिलान
नक्षत्र से 36 में से 21 गुण ही तय होते हैं — तारा, योनि, गण और नाड़ी। बाकी 15 के लिए दोनों की चंद्र राशि चाहिए, जो नक्षत्र से तय नहीं होती।
सबसे अच्छा मेल
सबसे कम मेल
पूरा गुण मिलान करेंअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इसीलिए मृगशिरा में जन्मे व्यक्ति की विंशोत्तरी दशा मंगल से शुरू होती है।
मृगशिरा नक्षत्र किस राशि में आता है?
मृगशिरा नक्षत्र दो राशियों में फैला है — पहला हिस्सा वृषभ में और बाक़ी मिथुन में।
मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें?
पद के हिसाब से वे, वो, का या की। जन्म के समय चंद्र किस पद में था, उसी का अक्षर लिया जाता है।
मृगशिरा नक्षत्र का गण और योनि क्या है?
मृगशिरा का गण देव और योनि सर्प (साँप) है। विवाह मिलान में गण से 6 और नाड़ी से 8 गुण तय होते हैं।