महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
oṁ tryambakaṁ yajāmahe sugandhiṁ puṣṭivardhanam, urvārukamiva bandhanānmṛtyormukṣīya māmṛtāt.
अर्थ
ऋग्वेद का मंत्र है — अर्थ है: हम त्र्यम्बक (तीन नेत्रों वाले शिव) का यजन करते हैं, जो सुगन्धित हैं और पुष्टि बढ़ाने वाले। जैसे पका खरबूजा बेल के बंधन से अपने आप छूट जाता है, वैसे ही हम मृत्यु के बंधन से छूटें — अमृत से नहीं। परंपरा इसे मृत्यु के भय से पार ले जाने वाला महामंत्र कहती है — शिव का सबसे गम्भीर जाप।
जाप कैसे करें
सोमवार, सावन और महाशिवरात्रि पर विशेष — और संकट के समय संकल्प लेकर। जाप 108 की माला से, उच्चारण धीमा और साफ़; परंपरा में इसका सवा लाख जप एक बड़ा अनुष्ठान है, जो गुरु या योग्य पण्डित के निर्देशन में होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महामृत्युंजय और ॐ नमः शिवाय में क्या अंतर है?
पंचाक्षर रोज़ के नमन का मंत्र है — छोटा, हर घड़ी का। महामृत्युंजय ऋग्वेद का लंबा मंत्र है, जो विशेष संकल्प से जपा जाता है। दोनों शिव के हैं, प्रयोजन अलग है।
क्या इसे बिना गुरु के जप सकते हैं?
साधारण श्रद्धा-जप कोई भी कर सकता है — नियम उच्चारण की शुद्धि का है। बड़े अनुष्ठान (सवा लाख आदि) परंपरा में निर्देशन के साथ किए जाते हैं।