गायत्री मंत्र का आरंभ
ॐ भूर्भुवः स्वः
oṁ bhūr bhuvaḥ svaḥ
अर्थ
ॐ भूर्भुवः स्वः गायत्री मंत्र की व्याहृतियाँ हैं — तीन लोकों के नाम: भू, भुवः, स्वः। जाप की माला पर यही आरंभ गिना जाता है; पूरी गायत्री एक पाठ है, मनका नहीं। परंपरा गायत्री को बुद्धि और विवेक का मंत्र कहती है — सवितुर से वही माँगा जाता है।
जाप कैसे करें
परंपरा में गायत्री संध्या के समय की है — सूर्योदय, दोपहर, सूर्यास्त। 108 की माला; उच्चारण साफ़ रखने पर परंपरा का सबसे ज़्यादा ज़ोर इसी मंत्र में है।
इस नाम के पाठ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या गायत्री मंत्र कोई भी जप सकता है?
आज की प्रचलित परंपरा में हाँ — स्त्री, पुरुष, कोई भी। पुरानी पाबंदियों पर मत अलग-अलग हैं; हम प्रचलित व्यवहार बताते हैं, फ़ैसला आपका।