हरे कृष्ण
हरे कृष्ण
hare kṛṣṇa
अर्थ
महामंत्र का आरंभ — हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। परंपरा कहती है कि कलियुग में नाम ही सबसे सीधा रास्ता है, और यह नाम सबसे खुला है — कोई विधि नहीं, कोई अधिकार नहीं, बस बोलना। मन बहुत भागे तो यही नाम उसे बैठाता है।
जाप कैसे करें
कोई नियम नहीं — यही इसकी पहचान है। जन्माष्टमी और एकादशी पर विशेष; नियमित जाप 108 की माला से, या बिना गिनती के कीर्तन में।
इस नाम के पाठ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरे का अर्थ क्या है?
हरे सम्बोधन है — हरि (कृष्ण) और राधा (हरा) दोनों की ओर संकेत माना जाता है। पुकार का शब्द है: हे हरि!